
गुजरात के वडनगर में योग मुद्रा में मिले 1000 साल पुराने कंकाल का लखनऊ में डीएनए टेस्ट किया गया. इससे इसकी उत्पत्ति के बारे में महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं. डॉ. नीरज राय की टीम ने कंकाल की खोपड़ी, दांत और कान की हड्डी से डीएनए नमूने लिए.
विशेषज्ञों का मानना है कि ध्यान मुद्रा में मिला यह कंकाल दर्शाता है कि वडनगर प्राचीन समय में एक महत्वपूर्ण बौद्ध केंद्र था. ऐतिहासिक रिकॉर्ड के अनुसार, भारत और मध्य एशिया के लोग इस स्थल पर आते थे. आगे के वैज्ञानिक परीक्षण, जैसे कि कार्बन डेटिंग, जारी हैं और विस्तृत डीएनए रिपोर्ट अगले महीने आने की उम्मीद है.
वडनगर में विकसित किया जा रहा है पुरातात्विक संग्रहालय
हालांकि, खोज के बाद से कंकाल को उचित संरक्षण के बिना खुला छोड़ दिया गया था. वडनगर में 400 करोड़ रुपये का पुरातात्विक संग्रहालय विकसित किया जा रहा है, और विशेषज्ञ इन खोजों को सही तरीके से संरक्षित करने पर जोर दे रहे हैं. इस खुलासे के बाद लोग हैरान हैं.
न्यूज एजेंसी ANI के अनुसार वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. नीरज राय ने कहा, “वडनगर एक पुरातात्विक स्थल है, जो 3000 वर्षों तक एक सभ्यता थी और पूरे भारत में एकमात्र ऐसा शहर है जिसे कभी विस्थापित नहीं किया गया. खुदाई के दौरान हमें एक पूरा कंकाल मिला, जिसने पुष्टि की कि किसी व्यक्ति ने वहां ‘समाधि’ ली होगी. हमने डीएनए सैंपलिंग की और पाया कि कंकाल का डीएनए गुजरात के लोगों से अधिक मेल खाता है. समाधि अवस्था में दफनाना 3000 साल पहले आम बात थी. वडनगर एक बौद्ध शिक्षण केंद्र था, जो न केवल भारत से बल्कि अन्य देशों से भी लोगों को आकर्षित करता था.”
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