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ब्लड ऑन कॉल सेंटर के चार साल पूरे, सामाजिक संस्थाओं ने दी शुभकामनाएँ

 

इंदौर। रक्त की एक बूंद किसी की जिंदगी बचा सकती हैऔर इसी संकल्प के साथ ब्लड ऑन कॉल सेंटर ने आज अपने चार वर्ष पूरे कर लिए। चार वर्षों में इस पहल के माध्यम से हजारों यूनिट रक्त जरूरतमंद मरीजों तक पहुँचाया गयाजिससे हजारों लोगों की जान बचाई गई। इस महत्वपूर्ण उपलब्धि का जश्न संचालनकर्ता शहीद ऊधम सिंह संवेदना सेवा समिति और गोल्ड कॉइन सेवा ट्रस्ट द्वारा अभिनव कला समाज में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में मनाया गया।

कार्यक्रम में समाज के प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों ने भाग लियाजिनमें परमिंदर सिंह भाटियाडॉ. रामु ठाकुरनंदकिशोर व्यास और देबज्योति डे प्रमुख थे। वक्ताओं ने ब्लड ऑन कॉल सेंटर की सराहना करते हुए इसे रक्तदान के क्षेत्र में क्रांतिकारी पहल बतायाजिसने अनगिनत जरूरतमंदों को जीवनदान दिया।

रक्त संकट: हर साल लाखों की जान बचाई जा सकती है

भारत में हर साल 15 लाख यूनिट रक्त की कमी दर्ज की जाती हैजबकि यदि सिर्फ 1% युवा नियमित रूप से रक्तदान करें तो यह कमी पूरी की जा सकती है। कार्यक्रम में परमिंदर सिंह भाटिया ने चिंता जाहिर करते हुए कहा कि रक्त की मांग और पूर्ति के बीच 15% की कमी बनी रहती हैजो कई मरीजों के लिए जीवन-मृत्यु का प्रश्न बन जाती है।

उन्होंने एक और चौंकाने वाला तथ्य साझा किया थैलेसीमिया के मरीजों को हर माह लगभग इतनी ही मात्रा में रक्त की आवश्यकता होती है। यदि शासन-प्रशासन और सामाजिक संस्थाएँ मिलकर प्रयास करें और युवाओं की रक्त जांच अनिवार्य कर दी जाएतो इस बीमारी को काफी हद तक रोका जा सकता है।

थैलेसीमिया : जागरूकता से बच सकता है अगली पीढ़ी

पुष्कर सोनी ने बताया कि भारत में हर साल लगभग 12,000 से 15,000 बच्चे थैलेसीमिया मेजर के साथ जन्म लेते हैंजिनका पूरा जीवन रक्त पर निर्भर करता है। विशेषज्ञों के अनुसारयदि विवाह के समय वर-वधू में से एक भी व्यक्ति थैलेसीमिया पॉजिटिव नहीं होतो यह अनुवांशिक बीमारी अगली पीढ़ी तक नहीं पहुँच सकती।

परमिंदर सिंह भाटिया ने कहा, "थैलेसीमिया जैसी गंभीर बीमारी को रोकने के लिए विशेष जन-जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है। अगर युवाओं की समय रहते जाँच हो और शादी से पहले इसकी स्क्रीनिंग अनिवार्य होतो हजारों मासूम बच्चों की जिंदगी बचाई जा सकती है।"

ब्लड ऑन कॉल: भविष्य की योजनाएँ और विस्तार

ब्लड ऑन कॉल सेंटर के संचालकों ने घोषणा की कि आने वाले समय में इस सेवा का और विस्तार किया जाएगाताकि हर जरूरतमंद को समय पर रक्त मिल सके और कोई भी व्यक्ति खून की कमी से अपनी जान न गंवाए।

कार्यक्रम में रक्तदान में विशेष योगदान देने वाली संस्थाओं को सम्मानित किया गया। वक्ताओं ने कहा कि "रक्तदान केवल दान नहींबल्कि जीवन बचाने की प्रक्रिया हैजिसमें हर नागरिक की भागीदारी होनी चाहिए।" कार्यक्रम का संचालन पुष्कर सोनी ने किया। आभार जगप्रीत सिंह टुटेजा और संजय अग्रवाल ने माना।

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