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आईपीएस ट्रेनिंग में क्या होता है? LBSNAA से अफसर बनने तक का समझिए पूरा सफर

 आईपीएस अफसर बनने के लिए संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सर्विस परीक्षा पास करना जरूरी है. यूपीएससी परीक्षा में टॉप रैंक हासिल करने वाले अभ्यर्थियों को आईएएस और आईपीएस के लिए चुना जाता है. आईपीएस यानी भारतीय पुलिस सेवा में भर्ती के लिए कई महीनों की कठिन ट्रेनिंग पूरी करना अनिवार्य है.

हर साल लाखों युवा आईपीएस अफसर बनने का सपना देखते हैं. इसके लिए दुनिया की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक यूपीएससी सीएसई पास करना जरूरी है. आईपीएस में भर्ती के लिए इसके अलावा कोई शॉर्टकट नहीं है. आईपीएस का फुल फॉर्म भारतीय पुलिस सेवा (Indian Police Service) है. यूपीएससी परीक्षा के तीनों राउंड में सफल अभ्यर्थियों को उनकी रैंक और वरीयता के आधार पर ट्रेनिंग का कॉल लेटर भेजा जाता है.

आईपीएस की ट्रेनिंग काफी कठिन और व्यापक प्रक्रिया है. इसके जरिए उम्मीदवारों को कानून-व्यवस्था बनाए रखने, अपराध से निपटने और नेतृत्व करने के लिए तैयार किया जाता है. इसमें कठिन असाइनमेंट के जरिए इनका टेस्ट लिया जाता है और इन्हें हर परिस्थिति के लिए तैयार किया जाता है. यह सफर UPSC सिविल सेवा परीक्षा पास करने के बाद शुरू होता है और लगभग 2 सालों तक चलता है. जानिए आईपीएस ट्रेनिंग सेंटर LBSNAA से लेकर अफसर बनने तक का पूरा सफर को चरण-दर-चरण समझते हैं:

1. फाउंडेशन कोर्स (LBSNAA, मसूरी)

  • कहां: लाल बहादुर शास्त्री नेशनल एकेडमी ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन (LBSNAA), मसूरी (IPS Training Centre).
  • अवधि: 3 महीने (आमतौर पर सितंबर से दिसंबर तक).
  • क्या होता है:
    1- यह कोर्स सभी सिविल सेवा अधिकारियों (IAS, IPS, IFS आदि) के लिए कॉमन होता है.
    2- इसमें भारतीय संविधान, इतिहास, अर्थशास्त्र, प्रशासनिक नैतिकता और पब्लिक सर्विस की बेसिक समझ दी जाती है.
    3- फिजिकल ट्रेनिंग शुरू होती है, जैसे सुबह की PT (फिजिकल ट्रेनिंग), योग और हॉर्स राइडिंग.
    4- टीमवर्क, नेतृत्व और सहयोग की भावना विकसित की जाती है.
  • खासियत: अलग-अलग सेवाओं के ट्रेनी एक साथ रहते हैं, जिससे आपसी समझ और नेटवर्किंग बढ़ती है.

2. फेज-I ट्रेनिंग (SVPNPA, हैदराबाद)

  • कहां: सरदार वल्लभभाई पटेल नेशनल पुलिस एकेडमी (SVPNPA), हैदराबाद.
  • अवधि: 11 महीने.
  • क्या होता है:
    1- यह IPS ट्रेनिंग का मुख्य हिस्सा है, जहां पुलिसिंग की बारीकियां सिखाई जाती हैं.
    2- इनडोर सब्जेक्ट्स: भारतीय दंड संहिता (IPC), आपराधिक प्रक्रिया संहिता (CrPC), साक्ष्य अधिनियम, पुलिस मैनुअल, साइबर क्राइम, फॉरेंसिक साइंस, आतंकवाद और आपदा प्रबंधन.
    आउटडोर ट्रेनिंग: हथियार चलाना (रिवॉल्वर, पिस्टल, राइफल, ग्रेनेड आदि).
    फिजिकल फिटनेस: दौड़, रॉक क्लाइंबिंग, असॉल्ट ट्रेनिंग, घुड़सवारी और परेड.
  • उद्देश्य: ट्रेनी को शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनाना ताकि वे चुनौतियों का सामना कर सकें.
  • खासियत: ट्रेनिंग में अनुशासन और आत्म-नियंत्रण पर जोर होता है. ट्रेनी को पुलिस स्टेशन और जिला स्तर पर नेतृत्व के लिए तैयार किया जाता है.

3. जिला प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (अपने कैडर में)

  • कहां: जिस राज्य का कैडर आवंटित हुआ है, वहां के जिले में.
  • अवधि: 6 महीने.
  • क्या होता है:
    1- ट्रेनी को असल पुलिसिंग का अनुभव दिया जाता है.
    2- थाने में काम करना, FIR दर्ज करना, जांच करना, भीड़ नियंत्रण और कानून-व्यवस्था बनाए रखना सीखते हैं.
    3- सीनियर ऑफिसर्स (SP, DSP) के साथ अटैचमेंट होता है, जो मेंटरशिप देते हैं.
    4- ग्रामीण और शहरी,  दोनों क्षेत्रों में काम करने का मौका मिलता है.
    खासियत: यह फील्ड एक्सपीरियंस ट्रेनी को प्रैक्टिकल चुनौतियों से रूबरू कराता है और किताबी ज्ञान को हकीकत में लागू करने की कला सिखाता है.

4. फेज-II ट्रेनिंग (SVPNPA, हैदराबाद)

  • कहां: फिर से SVPNPA, हैदराबाद.
  • अवधि: 1 महीने.
  • क्या होता है:
    1- जिला ट्रेनिंग के अनुभवों की समीक्षा और विश्लेषण.
    2- एडवांस्ड ट्रेनिंग: नेतृत्व कौशल, संकट प्रबंधन और विशेष पुलिस यूनिट्स (जैसे CID, CBI) की कार्यप्रणाली.
    3- फाइनल असेसमेंट और पासिंग आउट परेड.
    खासियत: यह ट्रेनिंग का अंतिम चरण होता है, जिसमें ट्रेनी को IPS अधिकारी बनने के लिए तैयार किया जाता है.

ट्रेनिंग की मुख्य बातें

  • शारीरिक फिटनेस: रोज सुबह PT, दौड़ और खेलकूद अनिवार्य हैं. IPS अधिकारियों को फील्ड में चुस्त-दुरुस्त रहना जरूरी है.
  • हथियार और तकनीक: आधुनिक हथियारों और तकनीकों (जैसे ड्रोन, साइबर टूल्स) का प्रशिक्षण.
  • मानसिक तैयारी: तनाव प्रबंधन, नैतिकता और जनता के प्रति संवेदनशीलता सिखाई जाती है.
  • वेतन: ट्रेनिंग के दौरान लगभग 35,000-40,000 रुपये मासिक स्टाइपेंड मिलता है (मेस और हॉस्टल चार्ज कटने के बाद).

ट्रेनिंग के बाद आईपीएस अफसर कब बनते हैं?

  • ट्रेनिंग पूरी होने के बाद ट्रेनी को औपचारिक रूप से IPS अधिकारी के रूप में नियुक्त किया जाता है.
  • पहली पोस्टिंग आमतौर पर असिस्टेंट सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस (ASP) के रूप में होती है.
  • इसके बाद करियर में SP, DIG, IG जैसे पदों तक प्रमोशन होता है.

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